नौकरी छोड़कर बनाया ब्रांड, HUL ने खरीद लिया 3000 करोड़ में-Minimalist Success Story?

जानिये जयपुर के दो भाइयों की Minimalist Success Story. 8 महीने में 100 करोड़ और 4 साल में 3000 करोड़ की HUL डील कैसे हुई?

भारतीय Startups के Ecosystem में रोज़ नई कहानियाँ जन्म लेती हैं। कोई फंडिंग के दम पर आगे बढ़ता है, तो कोई मार्केटिंग के शोर से। लेकिन बहुत कम कंपनियाँ ऐसी होती हैं जो प्रॉफिट, कस्टमर ट्रस्ट और लॉन्ग टर्म विज़न—तीनों को साथ लेकर चलती हैं।

आज की यह केस स्टडी जयपुर के दो भाइयों द्वारा बनाई गई ब्रांड Minimalist की है, जिसे 4 साल में लगभग 3000 करोड़ रुपये में Hindustan Unilever Limited (HUL) ने खरीद लिया।

यह कहानी सिर्फ एक ब्रांड की नहीं, बल्कि ईमानदार व्यापार की ताकत की कहानी है।


भाईचारे से बिजनेस तक

Minimalist Success के पीछे दो दिमाग हैं –

  • Mohit Yadav – Charted accountant और Buieness mind
  • Rahul Yadav – Technology और Product Expert

दोनों ने पहले बच्चों का एक ब्रांड बनाया और बेचा। फिर कुछ सालों तक CarDekho में काम किया। लेकिन इनका लक्ष्य साफ था—साथ रहना और अपना कुछ बड़ा बनाना।

2020 में महामारी के दौरान उन्होंने पर्सनल केयर मार्केट में एंट्री की। और पहले 1000 यूनिट लॉन्च कीं—Instagram पोस्ट के जरिए। कुछ ही दिनों में सब बिक गया। और यहीं से शुरू हुआ Minimalist का असली सफर।


4 साल की ग्रोथ – आँकड़ों में सफलता

वर्षटर्नओवर (₹ करोड़)प्रॉफिट (₹ करोड़)
वर्ष 1214
वर्ष 210512
वर्ष 31845
वर्ष 43501

खास बात – चारों साल कंपनी प्रॉफिट में रही।

जहां अधिकतर D2C ब्रांड्स ग्रॉस लॉस दिखाते हैं, वहीं Minimalist ने ग्रॉस ट्रस्ट कमाया।


Minimalist की 7 गेम-चेंजिंग स्ट्रेटजी

1. Honest Branding – केमिकल से डर क्यों?

जब मार्केट में “Natural”, “Organic”, और Herbal की भरमार थी, तब Minimalist ने साफ लिखा –
की हम एक्टिव केमिकल इंग्रीडिएंट्स इस्तेमाल करते हैं।

ब्रांड का पैकेजिंग ब्लैक एंड व्हाइट रखा गया—मतलब न ग्रे एरिया, न झूठे दावे।

जहां 79% ब्यूटी क्लेम्स ओवरस्टेटेड माने जाते हैं, वहीं Minimalist ने हर एक्टिव इंग्रीडिएंट की प्रतिशत मात्रा तक बोतल पर लिखी।


2. Product First, Marketing Later

अधिकांश ब्रांड कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग करते हैं। Minimalist ने खुद की फैक्ट्री लगाई।

  • बेहतर क्वालिटी कंट्रोल
  • महंगा लेकिन शुद्ध रॉ मटेरियल
  • क्लिनिकल टेस्ट रिपोर्ट्स पब्लिक शेयर

ब्यूटी इंडस्ट्री में जहाँ 90% मार्जिन आम बात है, वहीं इन्होंने 65% मार्जिन रखा।

मतलब – ज्यादा पैसा प्रोडक्ट में, कम पैसा कमाने में।


3. Real Influencer Marketing

इन्होने अपनी Marketing में कोई बॉलीवुड स्टार नहीं और
कोई नकली “Before-After” फोटो जैसी Marketing नहीं की।

जिन ग्राहकों को फायदा हुआ, उन्हीं से वीडियो टेस्टिमोनियल बनवाए।

जहाँ अन्य कंपनियों का मार्केटिंग खर्च 40–45% तक जाता है, वहीं Minimalist का मार्केटिंग खर्च लगभग 25% रहा।

ROAS (Return on Ad Spend) = 4x
1 लाख खर्च → 4 लाख सेल


4. Limited SKU Strategy

शुरुआत में सिर्फ 1 प्रोडक्ट उतारा।
और 1 साल में केवल 5-6 प्रोडक्ट।
आज भी लगभग 50-60 SKU ही।

कम प्रोडक्ट =

  • कम इन्वेंटरी
  • तेज मूवमेंट
  • कम वर्किंग कैपिटल

जहाँ अन्य ब्रांड्स 500+ प्रोडक्ट मैनेज करते हैं, Minimalist ने अपना फोकस्ड कैटलॉग रखा।


5.Affordable Pricing = Mass Adoption

इंटरनेशनल लुक + हाई क्वालिटी = प्रीमियम प्राइस?

नहीं।

इन्होंने प्राइसिंग 500–600 रुपये रेंज में रखी, जबकि समान कैटेगरी 1500–2000 में बिकती थी।

भारत में Scale का मतलब है “Value for Money”।


6. Customer Love = Real Asset

इंडस्ट्री रिपीट रेट: 15–20%
Minimalist रिपीट रेट: 60%

मतलब 100 में से 60 ग्राहक दोबारा खरीदते है।

यही असली कारण है कि HUL को लगा –
यह सिर्फ ट्रेंड नहीं, स्थायी ब्रांड है।


7. Distribution Mastery

शुरुआत: D2C वेबसाइट
फिर: Nykaa
फिर: Amazon India

आज:

  • फार्मेसी
  • जनरल स्टोर
  • मॉल
  • टियर 2/3 शहर
  • गांव

50% से ज्यादा बिक्री छोटे शहरों से।

फिर इंटरनेशनल विस्तार:
GCC, UAE, USA, Malaysia।
USA भारत के बाद दूसरा सबसे बड़ा Minimalist का मार्केट बना।


3000 करोड़ की डील – HUL क्यों आगे आया?

HUL जैसी कंपनी के पास पहले से ही बड़े ब्रांड्स हैं। फिर भी उसने Minimalist को क्यों खरीदा?

  • Gen Z और Millennial कनेक्ट
  • एक्टिव इंग्रीडिएंट आधारित ट्रेंड
  • हाई रिपीट रेट
  • प्रॉफिटेबल मॉडल
  • स्केलेबल D2C फाउंडेशन

HUL की 90 लाख से ज्यादा दुकानों तक पहुंच है। 100+ देशों में डिस्ट्रीब्यूशन है।

Founders ने समझदारी दिखाई –
“ऑनलाइन हमने जीत लिया, ऑफलाइन एक्सपर्ट को करने दें।”


Traditional vs Minimalist Model

पैरामीटरपारंपरिक ब्रांडMinimalist
ब्रांडिंगNatural/Herbal दावाएक्टिव केमिकल ट्रांसपेरेंसी
मार्जिन75–90%~65%
मार्केटिंग खर्च40–45%~25%
प्रोडक्ट रेंज500+ SKU50–60 SKU
रिपीट रेट20%60%
फोकसविज्ञापनप्रोडक्ट क्वालिटी

Minimalist से स्टार्टअप फाउंडर्स क्या सीखें?

  1. ट्रेंड के खिलाफ जाना गलत नहीं।
  2. प्रॉफिट और ग्रोथ साथ हो सकते हैं।
  3. कम SKU = ज्यादा एफिशिएंसी।
  4. ट्रस्ट > ट्रेंड।
  5. Exit स्ट्रेटजी भी विज़न का हिस्सा है।

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मेरी राय(Author Opinion)

मेरे अनुसार मुझे इस स्टोरी का सबसे मजबूत पहलू लगता है – ईमानदारी की मार्केटिंग नहीं, ईमानदारी का सिस्टम develop करो।

आज के समय में जहां अधिकतर स्टार्टअप “Funding को सफलता मानते हैं, Minimalist ने अपने “प्रॉफिट” को प्राथमिकता दी।

यह ब्रांड इसलिए नहीं बिका क्योंकि इसकी सेल ज्यादा थी।
यह इसलिए बिका क्योंकि इसका ग्राहक स्थायी था।

और जब कोई ब्रांड “आदत” बन जाता है, तब बड़ी कंपनियाँ उसे खरीदना चाहती हैं।

Disclamier

यहां पर हम जो भी जानकारी लिखते हैं वो सिर्फ एजुकेशन पर्पज के लिए लिखते हैं और इस ब्लॉग में जो भी डेटा का उपयोग किया गया है वो पुराने तथ्यों पर आधारित है या अनुमानित है कृपया इसे पूरी तरह से सही नहीं माने और अगर आपको कोई फैसला लेना हो तो आप किसी विशेषज्ञ की सलाह ले सकते हैं|


निष्कर्ष

जयपुर के दो भाइयों ने साबित कर दिया कि:

  • भाईचारा + विज़न = मजबूत नींव
  • प्रोडक्ट क्वालिटी + ट्रांसपेरेंसी = ग्राहक विश्वास
  • ग्राहक विश्वास + रिपीट रेट = स्केलेबल वैल्यू
  • स्केलेबल वैल्यू = 3000 करोड़ का एग्जिट

Minimalist की कहानी भारतीय D2C स्टार्टअप्स के लिए एक प्रेरणा है।

अगर आप भी बिजनेस शुरू करने की सोच रहे हैं, तो याद रखें —
मार्केटिंग से ब्रांड बन सकता है,
लेकिन ट्रस्ट से साम्राज्य बनता है।


अगर आपको यह केस स्टडी पसंद आई तो बताइए अगली केस स्टडी आपको किस ब्रांड पर चाहिए?

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