R&AW (Research & Analysis Wing) भारत की सबसे गुप्त खुफिया एजेंसी है। जानिए R&AW का इतिहास, इसके सीक्रेट ऑपरेशन, पाकिस्तान-बांग्लादेश युद्ध, सियाचिन, कारगिल और राजनीतिक हस्तक्षेप से जुड़ी पूरी सच्चाई|
Knowledge is Power– यह कहावत अगर किसी पर सबसे ज्यादा फिट बैठती है, तो वह हैं इंटेलिजेंस एजेंसियाँ। सीमाओं के बाहर जाकर, दुश्मन की जमीन पर, बिना नाम और पहचान के देश की रक्षा करना कोई मामूली काम नहीं है।
भारत की विदेशी खुफिया एजेंसी R&AW (Research & Analysis Wing) भी ऐसी ही एक एजेंसी है, जिसके कारनामे इतिहास में दर्ज हैं, लेकिन अक्सर पर्दे के पीछे।
R&AW की जड़ें: अंग्रेज़ों के समय से आज तक

भारत में खुफिया तंत्र की शुरुआत अंग्रेज़ों के दौर में हुई।
ब्रिटिश सरकार ने Thuggee & Dacoity Department बनाया, जिसने अपराधियों के बीच अपने एजेंट भेजकर नेटवर्क तोड़ा। यही मॉडल आगे चलकर इंटेलिजेंस का आधार बना।
1904 में बना Central Special Branch (CSB)
1906 में नाम बदला Central Criminal Intelligence Department (CCID)
आगे चलकर यही बना Intelligence Bureau (IB)
1947 के बाद IB भारत को मिला, लेकिन विदेश में ऑपरेशन का कोई अलग ढांचा नहीं था – और यही सबसे बड़ी कमजोरी बनी।
Press Information Bureau (PIB)
https://pib.gov.in
1962 और 1965: जब खुफिया विफलता ने युद्ध जितवा दिया
1962 – चीन युद्ध
चीन ने भारत में घुसपैठ कर ली, लेकिन IB को कोई ठोस इनपुट नहीं मिला।
भारत ने वायुसेना तक इस्तेमाल नहीं की – यह एक ऐतिहासिक भूल थी।
1965 – भारत-पाक युद्ध
एक बार फिर, बाहरी खतरों की सही जानकारी समय पर नहीं मिली।
इन दो बड़ी विफलताओं के बाद स्पष्ट हो गया कि भारत को एक अलग विदेशी खुफिया एजेंसी चाहिए।
R&AW की स्थापना: इंदिरा गांधी और R.N. काओ
1968 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने वरिष्ठ अधिकारी R.N. काओ को यह ज़िम्मेदारी सौंपी।
2 महीने की स्टडी
एक ब्लूप्रिंट
सीधी रिपोर्टिंग PM को
21 सितंबर 1968 – R&AW का जन्म
मुख्यालय: लोधी रोड, नई दिल्ली
शुरुआती बजट: लगभग $20 मिलियन
R&AW कैसे काम करती है? (Operational Structure)
- कोई नाम प्लेट नहीं
- कोई आधिकारिक पद नहीं
- “Secretary” और “Under Secretary”
- एजेंटों का नाम कहीं लिखा नहीं जाता
भर्ती की शर्त
उम्मीदवार को यह घोषणा करनी होती थी कि:
वह या उसका परिवार RSS या Communist पार्टी से जुड़ा नहीं है।
यही कारण है कि
RSS से जुड़ा व्यक्ति गृह मंत्री बन सकता है, लेकिन R&AW अधिकारी नहीं।
पहला बड़ा मिशन: पाकिस्तान में एजेंट कश्मीर बेदी
R&AW का पहला एजेंट पाकिस्तान में उतारा गया –
कोड नाम: कश्मीर बेदी
नया नाम: मोहम्मद इब्राहिम
रेडियो सिग्नल, सुरक्षित फोन लाइन और बाइक मैसेंजर से सूचनाएँ दिल्ली पहुँचती थीं।
1971: विमान अपहरण और बांग्लादेश का जन्म
हाशिम कुरैशी नामक आतंकी को R&AW ने डबल एजेंट बना दिया।
विमान अपहरण
लाहौर लैंडिंग
भुट्टो से मुलाकात
भारत ने पाकिस्तानी एयरस्पेस बंद किया
यही फैसला आगे चलकर 1971 के युद्ध और बांग्लादेश की आज़ादी की नींव बना।
पाकिस्तान का न्यूक्लियर प्रोग्राम और राजनीतिक दखल
R&AW एजेंटों ने
वैज्ञानिकों के बाल इकट्ठे किए
रेडिएशन टेस्ट से पुष्टि हुई – न्यूक्लियर गतिविधि चल रही है
लेकिन तत्कालीन PM मोरारजी देसाई ने:
ऑपरेशन की अनुमति नहीं दी
इज़राइल के साथ संयुक्त हमले को रोका
और फोन पर जनरल ज़िया को यह तक बता दिया कि
“हमें सब पता है”
नतीजा?
R&AW के कई एजेंट पकड़े गए और मारे गए।
1984: सियाचिन और Operation Meghdoot
लंदन में R&AW एजेंटों को पता चला कि पाकिस्तान ने
-50°C के कपड़े ऑर्डर किए हैं।
सूचना सेना तक पहुँची
सप्लाई डिले करवाई गई
13 अप्रैल 1984 – भारतीय सेना पहले पहुँची
आज तक सियाचिन भारत के पास है।
कारगिल: जब इंटेलिजेंस चूकी
- जूतों का ऑर्डर
- नई बटालियन
- ड्रोन सर्वे
- BSF रिपोर्ट
45 इनपुट में से सिर्फ 11 ऊपर पहुँचे
ARC का विमान एक मंत्री को ट्रिप पर दे दिया गया
परिणाम:
भारी नुकसान और शहादत
सुधार और NSC का गठन
1999 के बाद
- National Security Council (NSC)
- बेहतर समन्वय
- NSA की भूमिका मजबूत
आज भी यही ढांचा काम कर रहा है।
मेरी राय (Author Opinion)
मेरे अनुसार देश की रक्षा में सबसे गुप्त योगदान खुफिया एजेंसियों का होता है ये गुमनाम रहते हुए अपने दुश्मनों का पता लगाते हैं और देश की सुरक्षा करते हैं इसलिए इन्हें राष्ट्रसेवक कहा जाता है|
disclaimer
यहां पर हम जो भी जानकारी लिखते हैं वो सिर्फ एजुकेशन पर्पज के लिए लिखते हैं और इस ब्लॉग में जो भी डेटा का उपयोग किया गया है वो पुराने तथ्यों पर आधारित है या अनुमानित है कृपया इसे पूरी तरह से सही नहीं माने और अगर आपको कोई फैसला लेना हो तो आप किसी विशेषज्ञ की सलाह ले सकते हैं|
निष्कर्ष: R&AW – नायक, लेकिन बिना पहचान
R&AW के एजेंट
क्रेडिट नहीं लेते
नाम नहीं चाहते
सिर्फ देश की सुरक्षा चाहते हैं
राजनीतिक दखल और समन्वय की कमी ने कई बार नुकसान पहुँचाया, लेकिन सुधार के बाद आज भारत की सुरक्षा पहले से कहीं मजबूत है।
आप हमारी अन्य पोस्ट भी यहाँ पढ़ सकते|
- नौकरी छोड़कर बनाया ब्रांड, HUL ने खरीद लिया 3000 करोड़ में-Minimalist Success Story?
- What is global markets Investing?: क्यों सिर्फ indian stock market काफी नहीं है?AI Revolution And US IT stocks?
- 12+ Smartphone Tricks 2026: Android और iPhone के छुपे हुए फीचर्स जो आपकी Life Hack कर देंगे!
- NASA vs ISRO: Technology की असली कहानी – बजट नहीं, सोच तय करती है ताकत!
- Apple-Google-Amazon की असली कमाई का राज: क्यों दुनिया के इन्वेस्टर्स इन Tech Giants के पीछे भागते हैं?
Please don’t forget to leave a review.
Explore more by joining me on http://truewritespace.com