भारत Govt. Loan कैसे लेती है? बजट का कितना प्रतिशत कर्ज से चलता है, सरकार यह पैसा कहां खर्च करती है, फायदे-नुकसान और आम जनता पर इसका क्या असर पड़ता है—इस लेख में पूरी जानकारी आसान हिंदी में पढ़ें।

जब भी बजट आता है, एक सवाल हर आम इंसान के दिमाग में घूमने लगता है –
सरकार के पास इतना पैसा कहां से आता है?
क्या सरकार भी हमारी तरह लोन लेती है?
चलिए आज बिल्कुल आसान भाषा, देसी उदाहरणों और बिना घुमाए-फिराए समझते हैं कि Govt. Loan कैसे लेती है, बजट का कितना हिस्सा कर्ज से चलता है, और इसका असर हम पर कैसे पड़ता है।
Govt. को Loan को लेने की जरूरत क्यों पड़ती है?
सरकार भी कोई जादू की छड़ी नहीं घुमा सकती। उसका खर्च उसकी कमाई से अक्सर ज्यादा हो जाता है।
टैक्स से पूरी कमाई क्यों नहीं होती?
सरकार की इनकम आती है:
- इनकम टैक्स
- GST
- कॉरपोरेट टैक्स
- कस्टम और एक्साइज ड्यूटी
लेकिन भारत जैसे देश में:
- गरीब आबादी ज्यादा है
- टैक्स देने वालों की संख्या सीमित है
इसलिए टैक्स से पूरी जरूरतें पूरी नहीं होतीं।
विकास योजनाओं का बढ़ता खर्च
सड़क, रेलवे, मेट्रो, फ्री राशन, किसान योजना, महिलाओं की स्कीम – ये सब पैसा मांगते हैं। और यहीं से लोन की एंट्री होती है।
Govt. Loan कहां से लेती है?
अब सवाल ये कि सरकार आखिर किससे उधार लेती है?
RBI और ट्रेजरी बिल
सरकार RBI के जरिए शॉर्ट टर्म लोन लेती है।
ट्रेजरी बिल क्या होते हैं?
ये 91 दिन, 182 दिन या 364 दिन के छोटे लोन होते हैं, जिन्हें बैंक और बड़ी संस्थाएं खरीदती हैं।
पब्लिक से लिया गया लोन (Government Bonds)
सरकार:
- गवर्नमेंट बॉन्ड
- G-Sec
जारी करती है, जिन्हें:
- बैंक
- LIC
- PF
- Mutual Funds
खरीदते हैं। यानी आपका PF और इंश्योरेंस का पैसा भी सरकार को लोन जाता है।
विदेशी संस्थाओं और देशों से कर्ज
IMF, World Bank, ADB जैसी संस्थाएं या कुछ देशों से भी Govt. Loan लेती है, लेकिन सीमित मात्रा में।
बजट क्या होता है और इसमें लोन की भूमिका
बजट की बेसिक समझ
बजट = सरकार की साल भर की कमाई + खर्च की प्लानिंग।
Fiscal Deficit क्या होता है?
जब:
सरकार का खर्च – सरकार की कमाई = Fiscal Deficit
तो उस घाटे को पूरा करने के लिए लोन लिया जाता है।
भारत का कितने % बजट लोन से चलता है?
सीधी भाषा में समझिए
भारत के कुल बजट का लगभग 30–35% हिस्सा लोन से आता है।
हाल के आंकड़ों की सरल व्याख्या
- कुल बजट: मान लीजिए ₹45 लाख करोड़
- टैक्स + अन्य इनकम: ₹30 लाख करोड़
- बाकी ₹15 लाख करोड़ = लोन
लोन बनाम टैक्स रेवेन्यू
मतलब हर ₹100 खर्च में:
- ₹65 सरकार की कमाई
- ₹35 उधार
सरकार इस लोन का करती क्या है?
यह पैसा हवा में नहीं उड़ता।
इंफ्रास्ट्रक्चर
- हाईवे
- रेलवे
- एयरपोर्ट
- स्मार्ट सिटी
सब्सिडी और स्कीम्स
- फ्री राशन
- किसान सम्मान निधि
- LPG सब्सिडी
डिफेंस और इमरजेंसी खर्च
- सेना
- युद्ध तैयारी
- महामारी जैसी स्थिति
Govt. Loan कैसे चुकाती है?

टैक्स से वापसी
जैसे आपकी सैलरी से EMI कटती है, वैसे ही सरकार टैक्स से लोन चुकाती है।
नया लोन लेकर पुराना लोन
हां, ये सच है। इसे कहते हैं Debt Roll-over।
Govt. Loan का आम जनता पर असर
महंगाई
ज्यादा कर्ज = ज्यादा पैसा सिस्टम में = महंगाई।
टैक्स बढ़ने की संभावना
लोन चुकाने के लिए:
- टैक्स बढ़ सकता है
- नए टैक्स लग सकते हैं
सरकार का लोन लेना सही है या गलत?
फायदे (Pros)
- तेजी से विकास
- रोजगार
- इकोनॉमी को बूस्ट
नुकसान (Cons)
- ब्याज का बोझ
- आने वाली पीढ़ी पर असर
- आर्थिक संकट का खतरा
क्या Govt. Loan दिवालिया हो सकती है?
श्रीलंका जैसे उदाहरण
हां, गलत मैनेजमेंट से देश डिफॉल्ट कर सकता है।
भारत की स्थिति कितनी सुरक्षित?
भारत की:
- इकोनॉमी बड़ी है
- फॉरेक्स रिजर्व मजबूत
- टैक्स बेस बढ़ रहा है
इसलिए अभी खतरा नहीं, लेकिन सतर्कता जरूरी है।
आने वाले समय में सरकारी कर्ज का भविष्य
- इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर
- कर्ज का बेहतर मैनेजमेंट
- टैक्स बेस बढ़ाने की कोशिश
मेरी राय (author opinion)
मेरे अनुसार हर व्यक्ति के जीवन में एक ऐसा दिन आता ही है जब उसको लोन की जरूरत पड़े लेकिन सरकार के मामले में यह थोड़ा अलग होता है सरकार को देश की अर्थव्यवस्था चलाने के लिए लोन की आवश्यकता होती है इससे देश का विकास तेजी से होता है हां अगर लोन का सही उपयोग ना किया जाए या लोन ज्यादा ले लिए जाए तो इससे देश पर आर्थिक संकट आ सकता है|
Disclaimer
यहां पर हम जो भी जानकारी लिखते हैं वो सिर्फ एजुकेशन पर्पज के लिए लिखते हैं और इस ब्लॉग में जो भी डेटा का उपयोग किया गया है वो पुराने तथ्यों पर आधारित है या अनुमानित है कृपया इसे पूरी तरह से सही नहीं माने और अगर आपको कोई फैसला लेना हो तो आप किसी विशेषज्ञ की सलाह ले सकते हैं|
निष्कर्ष (Conclusion)
सरकार का लोन लेना न पूरी तरह गलत है, न पूरी तरह सही। यह चाकू जैसा है – सही इस्तेमाल में फायदेमंद, गलत इस्तेमाल में खतरनाक। जब तक कर्ज विकास के लिए है, तब तक चिंता नहीं, लेकिन बेवजह की फ्रीबीज भविष्य का बोझ बन सकती हैं।
- भारत का केंद्रीय बजट (आधिकारिक वेबसाइट)
https://www.indiabudget.gov.in - भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) – सरकारी बॉन्ड और कर्ज से जुड़ी जानकारी
https://www.rbi.org.in - पब्लिक डेट और फिस्कल डेफिसिट पर जानकारी (Ministry of Finance)
https://www.finmin.nic.in
FAQs
1. क्या सरकार RBI से सीधे पैसा छाप लेती है?
नहीं, नियमों के तहत सीमित प्रक्रिया होती है।
2. क्या Govt. Loan हम पर असर डालता है?
हां, टैक्स और महंगाई के रूप में।
3. भारत पर कितना कुल कर्ज है?
GDP का लगभग 80–85%।
4. क्या Govt. Loan बिना ब्याज होता है?
नहीं, हर लोन पर ब्याज देना पड़ता है।
5. क्या Govt. Loan चुकाना बंद कर सकती है?
सैद्धांतिक रूप से संभव है, लेकिन भारत में इसकी संभावना बहुत कम है।
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